प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को दी सलाह अब्दुल कलाम और सचिन तेंदुलकर से सीखें खुद से प्रतिस्पर्धा करना

उन्होंने कहा, सचिन तेंदुलकर का ही उदाहारण लें, तो बीस साल लगातार अपने ही रिकार्ड तोड़ते जाना, खुद को ही हर बार पराजित करना और आगे बढ़ना। बड़ी अद्भुत जीवन यात्रा है उनकी, क्योंकि उन्होंने प्रतिस्पर्द्धा से ज्यादा अनुस्पर्द्धा का रास्ता अपनाया।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं, खासकर विद्यार्थियों से महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से प्रेरणा लेने की बात कही है। इस साल देश के नाम अपने पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं और विद्यार्थियों को सचिन का अनुकरण करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि सचिन सिर्फ एक महान क्रिकेट खिलाड़ी ही नहीं हैं बल्कि एक वर्ल्ड आइकन भी हैं। उन्होंने कहा, ‘सचिन तेंदुलकर से सीखिए, अपने 20 साल लंबे क्रिकेट करियर में उन्होंने हर मैच में अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ा और दूसरा रिकॉर्ड बनाते गए। वह हर गुजरते दिन के साथ और बेहतर होते गए। उनकी सफलता का राज खुद से उनकी प्रतिस्पर्धा है। उन्होंने दूसरों से नहीं बल्कि अपने आप से ही प्रतिस्पर्धा की है। इसलिए वो सफल हैं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने विद्यार्थियों से कहा, ‘सिर्फ मार्क्स पाने के लिए पढ़ाई करने से हम अपने आप को एक दायरे में बांध लेते हैं। हमें ज्ञान अर्जित करने के लिए पढ़ना चाहिए, मार्क्स के लिए नहीं। हर प्रकार के निराशा की जड़ किसी से उम्मीद रखना है। चीजों को अपनाने से जिंदगी आसान होती है। आप को बीते हुए कल से आने वाले कल को बेहतर बनाने के लिए दूसरों की बजाए खुद से प्रतिस्पर्धा करना सीखना होगा।’ प्रधानमंत्री ने छात्रों को उदाहरण देते हुए कहा कि ज़्यादातर सफल खिलाड़ियों के जीवन की एक विशेषता है कि वो दूसरों से नहीं बल्कि खुद से प्रतिस्पर्धा करते हैं। अगर हम सचिन तेंदुलकर का ही उदाहारण लें, तो बीस साल लगातार अपने ही रिकार्ड तोड़ते जाना, खुद को ही हर बार पराजित करना और आगे बढ़ना। बड़ी अद्भुत जीवन यात्रा है उनकी, क्योंकि उन्होंने प्रतिस्पर्द्धा से ज्यादा अनुस्पर्द्धा का रास्ता अपनाया।

प्रधानमंत्री ने प्रतिस्पर्द्धा और अनुस्पर्द्धा के बीच अंतर बताते हुए कहा कि प्रतिस्पर्द्धा पराजय, हताशा, निराशा और ईर्ष्या को जन्म देती है, लेकिन अनुस्पर्द्धा आत्मंथन, आत्मचिंतन का कारण बनती है। संकल्प शक्ति को दृढ़ बनाती है। जब हम ख़ुद को पराजित करते हैं तो और अधिक आगे बढ़ने का उत्साह अपने-आप पैदा होता है। बाहर से कोई अतिरिक्त ऊर्जा की ज़रूरत नहीं पड़ती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कभी-कभी लगता है कि हम प्रॉपर एग्जाम की कसौटियों को समझ नहीं पाते हैं। हमारे सामने कलाम जी का एक उदाहरण है। वे एयरफोर्स के एग्जाम में फेल हो गए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वे मजबूती नहीं दिखाते तो क्या हमें इतना महान राष्ट्रपति मिल पाता?’

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